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Baba sahib BhimRao #Ambedkar on his 127th birth Anniversary

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Remembering Baba sahib BhimRao Ambedkar on his 127th birth Anniversary

हम  जब भी सविधान की बात करते है तो हमे बाबा साहेब अम्बेडकर जी का स्मरण होता है |

जिन्होंने हमारे सम्मान की रचना की बाबा साहेब का जीवन देश के नोजावान के लिए देश के बच्चे के लिए प्रेणादायक है वो कहा करते थे कि समाज व्यक्तियो से मिलकर बनता है |

ये समाज ये देश तब तक प्रगति नही कर सकता तब तक आगे नही बढ़ सकता जब तक समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास नहीं हो जाता |

बाबा साहेब का जीवन हम सभी के लिए उदहारण है जिनका जीवन देश की आज़ादी से भी बहुत पहले 1891 में हुआ उस ज़माने में हमारे देश में जातिवाद पर इतना भेदभाव था कि बाबा साहेब जी जब विद्यालय में जाते तो  उन्हें कक्षा में बैठने की  अनुमति नही थी पानी पीने की भी अनुमति नही थी हम सभी कल्पना कर सकते है कितने भेदभाव के साथ  कितना अपमान के साथ जीना पड़ता होगा|

लेकिन बाबा साहेब तकलीफों के सामने कमजोर नही पड़े उस संकल्प की शक्ति को देखिये उस समर्पण की शक्ति को देखिये उस त्याग, तपस्या उस संघर्ष की शक्ति  को देखिये कि एक समय था जब पानी पीने की अनुमति नही थी कक्षा में बैठने की अनुमति नही थी और एक समय आया जब 26 जनवरी 1950 को देश को अपना एक सविधान मिला जो बाबा साहेब अम्बेडकर जी द्वारा लिखा गया था ये थी हिंदुस्तान के एक नोजावान के संकल्प, समर्पण, संघर्ष की  ताकत |

आज हमे  अपने महापुरुषों से प्रेणा लेनी चाहिए जो सपने उन्होंने देखे थे वो काम हम सभी के लिए छोड़ गए है उन सभी कामो को पूरा करना उन सभी सपनो को पूरा करना इस देश के हर एक  नोजावान इस देश के हर एक उस व्यक्ति का का कर्त्तव्य बनता है समाज के प्रति जो हमारी जिम्मेदारिया है हमे उसे निबाना होगा पूरी निष्ठा के साथ निबाना होगा

वन्दे मातरम !

 

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