भारतीय सेना शौर्य, साहस, पराक्रम और बलिदान का प्रतीक

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मोहित मदनलाल ग्रोवर ने महान शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारतीय सेना शौर्य, साहस, पराक्रम और बलिदान का प्रतीक है। देश की सीमा पर सीना ताने प्रहरी के रूप में मौजूद हमारे देश के सैनिकों की वजह से आज हम अमन व चैन की सांस ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है कि जब-जब भी देश की सीमा पर किसी ने बुरी नज़र डाली है तब-तब हमारे देश के वीर जवानों ने अपने पराक्रम से दुश्मनों को सबक सिखाया है और अपने प्राणों को हंसरे-हंसते निछावर किया है।

उन्होंने वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि देश में एक तरफ जहां इन दिनों चीन विरोधी माहौल बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ 26 जुलाई का यह कारगिल विजय दिवस हमारे हौंसले बुलंद करता है। इस दिन को ही भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था।

ग्रोवर जी ने बताया कि जिस प्रकार 1999 में पाकिस्तान की कायराना हरकत का करारा जवाब देते हुए भारतीय सेना ने उसे रणभूमि में धूल चटा दी थी ठीक उसी प्रकार चीन को सबक सिखाने में हमारी सेना पीछे नहीं है। 60 दिनों तक चले कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के कई जांबाज शहीद हुए लेकिन आखिरकार पाकिस्तान को परास्त करते हुए सेना ने जीत का परचम लहराया था।

मोहित ग्रोवर ने कहा कि हमारे देश की सेना का इतिहास विशिष्ट और गौरवशाली है और इसकी शौर्य गाथाएं किसी भी भारतीय का सीना गर्व से भर देती है। आपदा राहत में भी भारतीय सेना का अतुलनीय योगदान रहा है जिसकी प्रतिष्ठा पूरे विश्व में है। जब सिविल प्रशासन आपदा प्रबंधन में अपने हाथ खड़े कर देती है, तब सेना के जवान ही मोर्चा संभालते हैं। मोहित मदनलाल ग्रोवर ने कहा मैं ऐसे महान वीर जवानों और उनके परिवार को कोटि कोटि नमन करता हूँ।

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